#32 – गौमाता को मच्छरों से कैसे बचाएं
गौमाता को मच्छरों से बचाने के लिए वैज्ञानिक, आयुर्वेदिक, आध्यात्मिक और
शास्त्रीय प्रयोग
धूप
मच्छरों के विरूद्ध सुरक्षा चक्र
धूप यज्ञ एवं अग्निहोत्र का लघु स्वरूप है।
धूप एक प्रकार की वैज्ञानिक चिकित्सा पद्धति है।
धूप श्वसन प्रणाली तथा त्वचा के कई रोगों को ठीक करती है।
गौशालाओं में हरी घास, गोबर, मूत्र और पानी की अधिकता होने के कारण, वहाँ नमी
रहना सामान्य बात है, इसलिए गौशालाओं का वातावरण नमी से होने वाले रोगों के
अनुकूल बना रहता है। वहाँ लगभग पूरे वर्ष मच्छरों का आक्रमण रहता है। खासकर
रात में मच्छरों को उड़ाने के लिए, गौमाता पूरी रात अपनी पूंछ, सिर और कान
फड़फड़ाती रहती हैं। फिर भी पूरी रात गौमाता का खून पीने वाले मच्छर गौमाता को
चैन से सोने नहीं देते। परिणामस्वरूप, उनका स्वास्थ्य बिगड़ जाता है। उनकी दूध
उत्पादन क्षमता कम हो जाती है। मच्छरों से दूध निकालने वाले और देखभाल करने वाली
महिलाओं को भी परेशान करते हैं । इस कारण वे पर्याप्त दूध नहीं निकाल पाते। नमी
अन्य कीटों और बीमारियों का भी कारण बनती है। पशुओं को मलेरिया जैसी कई
बीमारियां हो जाती हैं।
अद्भुत और चमत्कारी, सरल और अनुभव सिद्ध प्रयोग
धूप – यज्ञ
सामग्री
नीम के हरे पत्ते
जौ
गूगल
मेथी दाना
पीपल के हरे पत्ते
तिल
लोबान
हल्दी पाव
नीलगिरी के हरे
पत्ते
धान या चावल
कपूर
मिश्री
करंज के हरे पत्ते
इंद्रजौ
अजवाइन
गाय का घी
तुलसी के पत्ते
गोबर के उपले
जीरा
आक के पत्ते
आम की लकड़ी
मरुआ के पान
इसके अलावा, गायत्री परिवार, आर्य समाज और गांधी आश्रम के द्वारा तैयार यज्ञ
सामग्री भी इस्तेमाल की जा सकती है। जितने पदार्थ मिल सके उन सबको उपयोग में
ले। पौधे की पत्तियों को आधा हरा और आधा सूखा लें।
“शुद्ध” घी “और देशी गायों का गौमूत्र”
विधि:
एक लोहे के बर्तन में गाय के गोबर के कंडे रखें, उपरोक्त धूप सामग्री उसमें डालें, गाय
का घी डालकर धुआं करें। अग्नि प्रज्वलित न करके केवल धुआं ही निकलता रहे,
इसका ध्यान रखें। शाम के समय, गौशाला में चारों ओर घूम कर धूमीकरण करें तथा
धुएं के बर्तन को उचित दूरी पर रात भर रखें। यदि अग्नि प्रज्वलित हो जाए तो उस पर
गेहूं की भूसी डालें। धूमीकरण से दो घंटे पहले, गोबर के कंड़ो पर गौमूत्र से हलका
छिड़काव करें। यदि अग्नि प्रज्वलित हो जाए तो उस पर भी गौमूत्र का हलका छिड़काव
कर सकते हैं। धूमीकरण के लिए बताए गए पदार्थों में से जितने मिल पाए उनका
उपयोग करें। धूमीकरण समाप्त होने के बाद, प्रत्येक गाय को 25 ग्राम राख को पशु
आहार या गुड़ में मिलाकर खिलाएं। यज्ञ के बाद बची हुई धूप की राख अद्भुत एवं
रामबाण औषधि है।
अद्भुत और चमत्कारी परिणाम
● धूप से मच्छरों, गोचीड, जू , कीड़े और अन्य कीटों का संक्रमण कम हो जाएगा।
● धूप कई रोगाणुओं को मारती है। धूप वातावरण को स्वच्छ और पवित्र बनाती है
।
● चूँकि धूप यज्ञ का लघु स्वरूप है, इसलिए इससे वर्षा होगी एवं ओजोन गैसें
निर्मित होगी जो पृथ्वी के ओजोन वायु की परत के छेद को भरने में अंशतः
उपयोगी बनेगी ।
● प्राचीन ऋषिगण, संत तथा महात्मा जन अपने आश्रमों में निरंतर यज्ञ और धूनी
करते थे। घी का दीपक इसी यज्ञ का लघु स्वरूप है।
● भगवान श्रीराम और भगवान कृष्ण ने कई प्रकार के यज्ञ किए। हिंदू संस्कृति
‘यज्ञ’ की संस्कृति है। हिंदू धर्म के कई शास्त्रों में यज्ञ और धूप का वर्णन किया
गया है।
● धूप जलाने से गायों और अन्य जानवरों को मच्छरों और कई बीमारियों से
बचाया जा सकता है । पशुओं का स्वास्थ्य बनाये रखने में और उनकी सेहत में
सुधार लाने में गौशाला में धूप करना एक कारगार उपयोग है। उनकी दूध
उत्पादन क्षमता बढ़ जाती है। गौमाता का आशीर्वाद प्राप्त होता है। भगवान
कृष्ण और तैंतीस करोड़ देवता प्रसन्न होंगे। आपको धर्म, अर्थ, काम और मोक्ष
प्राप्त होंगे।
● जिस आंगन में गौमाता को पीड़ित किया जाता है वहाँ बहुत बड़ा पाप किया जाता है।
उनका कल्याण कभी नहीं होता। ‘धूप’ (यज्ञ) करने से मनुष्य, पशु, पक्षी, पौधे
रोग मुक्त और दीर्घायु प्राप्त करते हैं और साथ ही पर्यावरण शुद्ध और पवित्र
बनता है। धूप पूरी तरह से एक वैज्ञानिक तरीका है। आधुनिक वैज्ञानिक इसका
समर्थन करते हैं।
● कहा गया है कि गाय के 120 ग्राम घी को प्रज्वलित करने पर उसमें से एक टन
ऑक्सीजन पैदा होती है।
● गाय के घी से यज्ञ करने पर वातावरण में मौजूद परमाणु विकिरणों के प्रभाव को
दूर करता है।
● यदि गाय के घी को चावल, जौ, तिल और अन्य जड़ी-बूटियों के साथ मिश्रित
कर गोबर के कंडो से यज्ञ किया जाए, तो एथिलीन ऑक्साइड, प्रोपलीन ऑक्साइड
और फोर्मल डिहाइड्रेट जैसी गैसें उत्पन्न होती है।
● प्रोपलीन ऑक्साइड बारिश लाने का काम करता है। बारिश लाने के लिए बलि दी
जाती है। इसे परज्ञान यज्ञ कहा जाता है।
● एथिलीन ऑक्साइड बारिश लाने का कार्य करती है और फॉर्मल डिहाइट्रेट
कीटाणुनाशक होता हैं। इस गैसो का उपयोग ऑपरेशन थिएटरों को जंतु रहित
करने के लिए किया जाता है।
● विज्ञान के सिद्धांत के अनुसार, कोई भी पदार्थ नष्ट नहीं होता बल्कि अन्य
स्वरूप में परिवर्तित हो जाता है इसी प्रकार घनरूपी औषिधियाँ व घी धूप (यज्ञ)
के कारण विभिन्न गैसों में परिवर्तित हो जाता है। बल्कि इनका औषधीय प्रभाव
कई गुना बढ़ जाता है।