#31 – बीमार जानवरों के लक्षण या चिन्ह
● चबाना कम या बंद कर देता है।
● चारा- पशु आहार कम मात्रा में लेना अथवा पूरी तरह से बंद कर देता है।
● सांस चढ़ना, हांफना या छींके आना आदि लक्षण दृष्टिगोचर होते है।
● आँखों से पानी निकलता है। आंखें चिपचिपी हो जाती हैं । पशु आंखें बंद रखना
पसंद करते हैं। शरीर की त्वचा खुरदरी हो जाती है। बाल झड़ जाते हैं।
● नाक पर पानी की कोई बूंद नहीं दिखती।
● मुंह से झाग निकलता है। मुंह में छाले पड़ जाते हैं।
● पतले सफेद, पीले या हरे रंग का दस्त होता है। बार-बार दस्त लगते है। इसमें
मल और गोबर से गंध आती है।
● कान, सिर और पूंछ बार-बार हिलाते रहते हैं।
● बार-बार सिर ठोकते रहते हैं।
● बार-बार उठक बैठक करता है और बेचैन होकर भागा दौड़ी करता है।
● गले सूज कर लाल हो जाता है।
● गाय दूध नहीं निकलने देती। कम दूध देती है। दूध में रक्त और मवाद होता है।
● थन और अडर सूज कर लाल रंग के हो जाते हैं।
● खुर में कीड़े होकर मवाद हो जाता है।
● भीड़ से अलग अकेला रहना पसंद करता है।
● अक्सर मारने के लिए दौड़ता है। अजीब तरह से व्यवहार करता है।
● पेट में सूजन हो जाती है। कभी-कभी एक बड़ी गांठ दिखाई देती है।
● अजीब आवाज करता है। चिल्लाता है। चीखता है।
● शरीर गर्म हो जाता है।
● अपने ही शावक को दूध नहीं पीने देता।
● अक्सर चक्कर खाकर गिर जाता है। बेहोश हो जाता है।
● रोगी पशु में कमजोरी के कारण पसलियां दिखाई देती हैं। वजन कम हो जाता
हैं।
● मूत्राशय सूजकर लाल हो जाता है।
● मालिक को नहीं पहचानता। उसे भी मारने के लिए दौड़ता है।
● कभी-कभी फिट यानी दौरा पड़ जाने से शरीर जकड़ जाता है।
आश्चर्य:
जानवरों को बिजोरा फल खिलाने से अगर उसके पेट में लोहे की कील आदि हो तो वह
पिघल जाती है और पथरी भी घुल कर निकल जाती है और पशु रोग मुक्त हो जाता है।