#29 – बीमार पशु का आहार
भूमिका:
विभिन्न रोगों से पीड़ित पशु दर्द और पीड़ा के कारण पर्याप्त भोजन नहीं ले पाता। रोग
के कारण जानवरों को खाने की इच्छा नहीं होती जिस की वजह से वह दुर्बल और
कमजोर होते जाते हैं। इसलिए पशु रोगों से लड़ने की शक्ति खो देता है।
किस तरह का भोजन दें:
बीमारी की स्थिति में, जानवर का हिलना डुलना बंद हो जाता है मतलब कि व्यायाम
रुक जाता है।पाचन क्रिया धीमी हो जाती है जिसके कारण भारी भोजन का पाचन नहीं
हो पाता।
इसलिये बीमार पशुओं को सुपाच्य व तरल भोजन दें। जिस खाद्य पदार्थ में खनिज
तत्व और विटामिन भरपूर मात्रा में हो, प्राकृतिक तत्वों से भरपूर हो, जो भोजन के
अलावा औषधी का भी काम करे और जिस भोजन को पचाने के लिए ज्यादा मेहनत ना
करनी पड़े ऐसा भोजन रोगी पशु के लिये उपयुक्त होता है ।
हो सके तो ज्यादा उबला हुआ तरल तथा भाप से पकाया, स्वच्छ और कीट-मुक्त
भोजन प्रदान करें। ऐसे समय में उसका पाचन पूरी तरह से धीमा हो जाता है। ऐसे
समय में संक्रमण या इन्फेक्शन जल्दी लग जाता है इसलिए शुद्ध और जंतु मुक्त
खाना देना आवश्यक है।
तरल पदार्थ देने से पशु आसानी से उसे ग्रहण कर सकता है और उसे आसानी से पचा
भी सकता है।
तरल खाद्य पदार्थों के प्रकार
पानी की राब:
● 4 लीटर पानी
● 2 किलो चावल, जौ, बाजरा, ज्वार, मक्का सभी सामग्रियों से मिश्रित मोटा
आटा
● 50 ग्राम सोंठ, सुवा दाना, अजवाइन, पीपरामूल, काली मिर्च, मेथी मिश्रित
पाउडर
● 300 ग्राम देसी गुड़ – केमिकल रहित गुण ही उपयोग में ले।
● 25 ग्राम नमक
उपरोक्त सभी चीजों को पानी में मिलाकर धीमी आंच पर अच्छे से उबाल लें । जब 2
लीटर पानी बच जाए तो ठंडा करके पिलाएं।
● बड़े पशु को 2 लीटर – दिन में दो बार
● छोटे पशुओं को 1 लीटर – दिन में दो बार
दूध की राब:
● 4 लीटर दूध
● 2 किलो चावल, जौ, बाजरा, ज्वार, मक्का सभी सामग्रियों का मिला हुआ मोटा
आटा
● 50 ग्राम सोंठ, सुवा दाना, अजवाइन, पीपरामूल, काली मिर्च, मेथी मिश्रित
पाउडर
● 300 ग्राम देसी गुड़ – केमिकल रहित गुण ही उपयोग में ले।
उपरोक्त सभी चीजों को पानी में मिलाकर धीमी आंच पर अच्छे से उबालें । जब 3
लीटर दूध बच जाए तो ठंडा करके पिलाएं।
● बड़े पशु को 3 लीटर – दिन में दो बार
● छोटे पशुओं को 1 लीटर – दिन में दो बार
छाछ की राब:
● 3 लीटर पानी
● 2 किलो चावल, जौ, बाजरा, ज्वार, मक्का सभी सामग्री का मिला हुआ मोटा
आटा
● 50 ग्राम सोंठ, सुवा दाना, अजवाइन, पीपरामूल, काली मिर्च, मेथी मिश्रित
पाउडर
● 300 ग्राम देसी गुड़ – केमिकल रहित गुण ही उपयोग में ले।
● 25 ग्राम नमक
उपरोक्त सभी चीजों को पानी में मिलाकर धीमी आंच पर अच्छे से उबालें । जब 3
लीटर पानी बच जाए तो ठंडा करके 2 लीटर छाछ रोगी पशु को पिलाएं।
तरल भोजन की मात्रा:
उक्त प्रकार की कोई भी राब बड़े पशु को दिन में 2 से 3 बार कम से कम 2 लीटर जरूर
पिलानी चाहिए।
सावधानियां:
जो पशु मलेरिया या सर्दी से संक्रमित हो उन्हें छाछ की राब ना देकर दूध या पानी की
राब देनी चाहिए।
हरी सब्जियों या फलों का आहार:
फल, कच्चा-पक्का पपीता, कच्चा-पक्का केला, जीवंती, कच्चे पक्के टमाटर, कद्दू,
गोभी, गाजर, आंवला,लौकी, बिल्व का गूदा , खीरा, गाजर, शकरगंज, तरबूज, मूली
जैसे फलों के छिलके निकालकर छोटे-छोटे टुकड़े कर गुड़ और नमक छिड़क कर पशु
को खिलाएं।
बड़े जानवरों 1 दिन में 3 किलो और छोटे जानवरों को 1 किलो खिलाएं। गुड़ की मात्रा
200 ग्राम और 15 ग्राम नमक तक डाल सकते।
सब्जियां:
बीमार जानवरों को ताजा, पालक, मूली, जिवंती के फल और पत्ते, मेथी, हरा धनिया
आदि पत्ते और सब्जियों को गर्म पानी से अच्छे से धो कर छोटे-छोटे टुकड़े कर उचित
मात्रा में गुण तथा नमक डालकर खिलाएं। इसे बड़े जानवरों को 2 किलोग्राम दिन में दो
बार और छोटे बछड़ों को दिन में दो बार 1 किलोग्राम की मात्रा में खिलाएं।
बहुत कमजोर जानवरों के लिए:
बड़े जानवरों को 250 ग्राम की मात्रा में तिल, देशी कपास या सूरजमुखी के तेल में गुड़
डालकर दिन में दो बार पिलाएं। छोटे बच्चों को 100 ग्राम की मात्रा में पिलाना चाहिये।
बीटी कॉटन का तेल कभी भी ना पिलाए।
बीमार जानवर:
देसी कपास की खली, मूंगफली या तिल की खली या पपड़ी या बांटे को अच्छे से
उबालकर थोड़ा- थोड़ा गुड़ डालकर दिन में दो बार 2 किलो तक खिला सकते।
चेतावनी:
बीमार या स्वस्थ पशु को कभी भी गेहूं का दलिया या आटा या गेहूं से निर्मित अन्य
कोई भी चीजें ना दे। इन चीजों से पाचन क्रिया मंद होकर मंदाग्नि और कब्ज की
शिकायत हो जाती है। इसकी जगह पर जौ या जौ के दलिये को उबालकर दिया जा
सकता है।
तंदुरुस्त पशुओं के लिए:
तंदुरुस्त पशुओं को भी जौ, मक्का, चावल, बाजरे, ज्वार के मोटे पिसे हुए आटे को,
छाछ या दूध में पकाई हुई राब, गुड़ और नमक मिलाकर सप्ताह में दो बार दे। इससे
उन्हें विटामिन और खनिज तत्व मिलेंगे। शारीरिक शक्ति में वृद्धि होगी। प्रसव वाले
पशु को बांटे में देसी कपास की खली के साथ सुवादाना, मेथी, अजवाइन, नमक, सूखा
खोपरा, गुड एवं पीपला मूल डालकर पकाया हुआ पौष्टिक आहार उपयुक्त मात्रा में दे।
“प्राकृतिक चिकित्सा” का अर्थ है, जब कोई व्यक्ति या जानवर बीमार पड़ जाए तो
प्राकृतिक चिकित्सा पद्धति अनुसार उसे उपवास करवाना चाहिए। उपवास दुनिया की
सबसे श्रेष्ठ पद्धति है। उपवास सबसे बड़ी औषधि है। आमतौर पर जानवर बीमार होने
पर खाना बंद कर देते हैं। | इसलिए, बीमार जानवरों को कम मात्रा में, तरल एवं
सुपाच्य भोजन दें। फल और सब्जियां देना उचित है।
स्वस्थ या बीमार जानवरों को चना, मूंग, मोठ, अरहर, जौ, मक्का, ज्वार और बाजरा
आदि भिगोकर, अंकुरित होने पर खिलाने से पूर्ण पौष्टिक भोजन मिलेगा।