#13 – पेचिश, दस्त, दस्त (डायरिया)
लक्षण और कारण:
दूषित, कीटाणु युक्त झील, नहर या गंदे नाले का पानी पीने से या सड़े-गले, शैवाल या
फंगस लगा हुआ चारा खाने तथा जल पीने से पशुओं को दस्त लग जाते लगता हैं ।
पतला, चिपचिपा, सफेद या हरे रंग का दस्त होता है। गोबर में से दुर्गंध आती है है।
जानवर कमजोर और दुर्बल हो जाता है। सुस्ती बनी रहती है। दुर्बलता आ जाती है। पशु
को खड़ा रहना या चलना अच्छा नहीं लगता। अगर समय रहते पशुओं का इलाज नहीं
किया जाए तो हालत और भी गंभीर हो सकती है। दूध का उत्पादन यहां तक घट जाता
है कि उनके बच्चों को भी पिलाने के लिए दूध नहीं बचता। कमजोरी के कारण चक्कर
आकर पशु गिर जाता है।
बीमारी के
बीमारी के उपचार हेतू उपयुक्त पदार्थ:
| 2 लीटर देसी गाय का मठ्ठा | 20 ग्राम बायबिडंग |
| 20 ग्राम गिलोय | 20 ग्राम फिटकरी का पानी |
| 25 ग्राम बील्व फल का गर्भ | 200 ग्राम देसी गुड – केमिकल बिनाका |
| 25 ग्राम सुवा दाना Dill Seeds | 25 ग्राम टारपीन का तेल |
| 25 ग्राम जायफल | 20 ग्राम अतीस की जड़ Aconitum heterophyllum |
| 20 ग्राम रसोंत | 25 ग्राम त्रिफला चूर्ण |
| 25 ग्राम नमक | 25 ग्राम सोंठ |
| 100 ग्राम अदरक | 20 ग्राम सरसों के दाने |
| 20 ग्राम सोडा बाई कार्ब | 50 ग्राम चूने का पानी |
| 20 ग्राम अनार की छाल | 50 ग्राम आम की गुठली |
| 25 ग्राम सौंफ | 25 ग्राम तुलसी |
उपरोक्त सामग्रियों , अपने क्षेत्र में जितनी हो सके उतना सामग्री का उपयोग करें।
कैसे बनाएं:
उपरोक्त आयुर्वेदिक जड़ी बूटियों को काट कूट कर तथा बारीक पीसकर मठ्ठे में
डालकर अच्छी तरह मिला लें। तैयार मिश्रण को छानकर स्टील, मिट्टी या कांच के
बर्तन में रख ले।
इस दवा का उपयोग 90 दिनों तक किया जा सकता है।
उपयोग कैसे करे:
विधि – 1
उपरोक्त औषधीय मट्ठा गाय, भैंस या पशु को एक समय में 2 लीटर दिन में तीन बार
पिलाएं। ना पीने पर नाल से पिलाए।
विधि – 2
बड़े जानवरों के लिए 2 लीटर गाय के दूध से छाछ बनाकर उसमें उपरोक्त औषधियों के
साथ चावल, मक्का, ज्वार, बाजरा या जौ का आटा 2 किलो मिलाकर अच्छे से उबाले
और 200 ग्राम गुड़ मिलाकर ठंडा होने पर पिलाएं। साथ में मूंग का पानी भी गुड़
मिलाकर पिलाएं।
खुराक:
मवेशियों को 4 लीटर देसी गाय के मठ्ठे में चावल, बाजरा, जौ, ज्वार और मकई सभी
का मोटा पिसा हुआ 2 किलो आटा डालकर अच्छे से पकाई हुई राब बनाकर दिन में
तीन बार दे। किसी भी प्रकार का भारी भोजन ना दे। एक सप्ताह तक केवल हल्का
तरल भोजन गुड़ और नमक मिलाकर दे।
कच्चा या कटा हुआ पपीता, केला, गाजर, मूली, कद्दू , मेथी, सुवा, विषखपरा और
पालक को काट के दे। दिन में दो या तीन बार तीन किलो तक दे। नमक या गुड़
मिलाकर भी दे सकते हैं।
नोट:
जानवरों को खड़े होने के लिये मजबूर न करें और आराम करने दे।
- दूध बढ़ाने के लिए, जिवंती के फल, लौकी, केला, शतावरी, देशी कपास और गुड़
दें।