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दाद, खाज, खुजली (त्वचा के रोग)

rog • October 1, 2026

#12 – दाद, खाज, खुजली (त्वचा के रोग)

लक्षण और कारण:

गायों को कीचड़, गोबर, मूत्र से सनी जगह में न रखे क्योंकि यहाँ पर प्रचुर मात्रा में
रोगाणु होते हैं। गंदे पानी के पोखर में स्नान करने से जानवर के शरीर पर कीचड़ और
गंदगी जमा हो जाती है। इसमें कई बीमारियां के किटाणु होते हैं जो पशु को चर्म रोग
उत्पन्न करने में सक्षम होते हैं। यथा खुजली, और एक्जिमा आदि रोग से जानवरों में
त्वचा-रोग से होने वाली पीड़ा होने की सम्भावना बढ़ जाती है। वह हिस्सा सूज जाता
है।पशुओं में थकावट दिखाई देती है।जानवर अपने शरीर को पेड़ से या दीवार पर रगड़
कर खुजलाने का प्रयास करता रहता है। पशु दर्द का अनुभव करता है। वह भोजन
करना छोड़ देता है तथा शीघ्र ही दुर्बल हो जाता है। उसकी दूध उत्पादन क्षमता में कमी
आ जाती है।

बीमारी के

बीमारी के उपचार हेतू उपयुक्त पदार्थ:

500 ग्राम गौमूत्र (Cow Urine of Indigenous Breed) 100 ग्राम नीम के पत्ते (Azadirachta indica)
100 ग्राम गाय का गोबर Cow Dung of Indigenous Cow 50 ग्राम करंज (Pongamia pinnata)
50 ग्राम नमक 20 ग्राम हींग (Asafoetida)
50 ग्राम लसुन 25 ग्राम हल्दी
50 ग्राम सीताफल के पत्ते Sugar-apple leaves 25 ग्राम तंबाकू (Tobacco)
50 ग्राम आक (मदार) Calotropis gigantea 20 ग्राम शुद्ध गंधक Sulphur powder
25 ग्राम चूना 25 ग्राम भीलावा Semecarpus Anacardium Seeds
50 ग्राम अडूसा Adhatoda Vasica 25 ग्राम नीला थोथा Copper Sulphate
25 ग्राम चोपचीनी Smilax China 25 ग्राम नौसादर Sal Ammoniac

उपरोक्त सामग्रियों से, अपने क्षेत्र में जितनी उपलब्ध हो सके उतनी सामग्री का
उपयोग करें।

कैसे बनाएं:

उपरोक्त आयुर्वेदिक जड़ी बूटियों को काट कूट कर तथा बारीक पीसकर गौमूत्र में
डालकर अच्छी तरह उबालें । ठंडा होने पर तैयार मिश्रण को छानकर स्टील, मिट्टी या
कांच के बर्तन में रख ले।
इस दवा का उपयोग 90 दिनों तक किया जा सकता है।

उपयोग कैसे करे:

उपरोक्त गौमूत्र से निर्मित दवा को दिन में तीन से चार बार पशु के शरीर पर रगड़ें।
सात दिन तक मालिश करें।

सावधानियां उपरोक्त दवाई के उपयोग के बाद (दवाइयां जहर युक्त होने के कारण),
अपने हाथों को साबुन से अच्छी तरह धो लें। पशु के थनों को बोरिक पाउडर या डेटॉल से
अच्छी तरह धोने के बाद ही दूध निकाले और अंत में थनों को स्वच्छ पानी से धो दे।

परिणाम:

गौमूत्र में कार्बोलिक एसिड जैसे अनेक जंतु नाशक पदार्थ है। यह पदार्थ सफाई का काम
करते हैं। इसमें नीला थोथा, तंबाकू, लहसुन और गंधक जैसी आयुर्वेदिक औषधियां भी
जंतु नाशक होने के कारण पशुओं के दाद, खाज और खुजली जैसे दर्दनाक चर्म रोग को
मूल से नष्ट कर देते हैं। चमड़ी स्वच्छ और जंतु रहित बन जाती है।

नोट:

करंज के तेल और नीम के तेल से भी मालिश की जा सकती है। B-Tex मरहम की
मालिश भी की जा सकती है।

●​ चमड़ी के रोगों में गौमूत्र अद्भुत एवं चमत्कारी परिणाम देता है।

●​ गौमूत्र और उपरोक्त जड़ी बूटियों के घोल से पशु के शरीर पर मालिश करने से
त्वचा पर मौजूद मल , कचरा और रोग के कीटाणु दूर हो जाते हैं। त्वचा के छिद्र
खुल जाते हैं। उनमें से पसीने के रूप में जो अपशिष्ट निकलता है वह शरीर रोग
मुक्त बनाता है। इससे किडनी पर पड़ने वाला अतिरिक्त दबाव कम होता है।

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