#11 – सूजन, जोड़ों और मांसपेशियों में दर्द, सुन्नपना
लक्षण और कारण:
एक ही प्रकार के क्षार वाली हरी घास बहुत अधिक मात्रा में खाने एवं रासायनिक,
जहरीले कीटनाशकों और रासायनिक उर्वरकों से उत्पन्न घास खाने से शरीर में
विषाक्त पदार्थों का उत्पादन होता है जो जानवरों में सूजन और जोड़ों के दर्द का एक
कारण बनता है। खूंटे से बांध के रखने से भी पशुओं के जोड़ों में अकड़ाहट आ जाती है।
जोड़ों के दर्द के कारण पशु लंगड़ाता है। पशु ज्यादातर समय बैठे रहना पसंद करते हैं।
कई बार कुछ नुकीली अथवा ठोस तथा पथरीली लगने या टकराने से जानवर के शरीर
पर सूजन आ जाती है। त्वचा लाल या काली हो जाती है। जानवर दर्द और बेचैनी
महसूस करता है। किसी भी गाय, भैंस या पशु के लिए यह दुख दायक स्थिति होती है।
पशु दर्द से तड़पता है। उसकी सांस तेजी से चलने लगती है। वायु के प्रकोप या कब्जे से
भी ऊपर बताई बीमारियां होती है।
बीमारी के
बीमारी के उपचार हेतू उपयुक्त पदार्थ:
| 1 लीटर गौमूत्र (Cow Urine of Indigenous Breed) | 50 ग्राम नमक |
| 25 ग्राम हल्दी | 50 ग्राम सोंठ |
| 100 ग्राम नीम के पत्ते (Azadirachta indica) | 50 ग्राम कायफल Myrtus |
| 50 ग्राम आक (मदार) Calotropis gigantea | 100 ग्राम पलाश के पत्ते |
| 100 ग्राम प्याज | 50 ग्राम करंज (Pongamia pinnata) |
| 50 ग्राम ताज | 100 ग्राम बबूल की छाल |
| 50 ग्राम अपामार्ग के पत्ते | 50 ग्राम लसुन |
| 25 ग्राम तारपीन का तेल Turpentine Oil | 100 ग्राम गाय का गोबर Cow Dung of Indigenous Cow |
| 50 ग्राम आयोडेक्स बाम | 50 ग्राम गूगल |
उपरोक्त सामग्रियों में से जितनी अपने क्षेत्र में उपलब्ध हो उतनी सामग्री का उपयोग
करें।
कैसे बनाएं:
उपरोक्त आयुर्वेदिक जड़ी बूटियों को काट कूट कर तथा बारीक पीसकर गौमूत्र में
डालकर अच्छी तरह उबालें । ठंडा होने पर तैयार मिश्रण को छानकर स्टील, मिट्टी या
कांच के बर्तन में रख ले।
मालिश के लिए आयोडेक्स का उपयोग करें।
इस दवा का उपयोग 90 दिनों तक किया जा सकता है।
उपयोग कैसे करे:
विधी – 1
उपरोक्त औषधीय गौमूत्र सहन हो सके उतना गर्म करके सूती कपड़े के साथ सूजन
और जोड़ों पर बार-बार सिकाई करें। दिन में तीन से चार बार एक हफ्ते तक दोहराए।
गौमूत्र की मालिश करें।
विधि – 2
गाय के गोबर में नमक, हल्दी, नीम और सोंठ डालकर गर्म करें, इसे एक सूती कपड़े में
लपेटें और सिकाई करें। गोबर के उपले जलाकर सूती कपड़े को गर्म कर लगाए गए लेप
पर सिकाई करें। यह प्रक्रिया दिन में 2 से 3 बार करें।
अलसी को कुट काटकर लेप लगाने से भी सूजन कम हो जाती है। ।
विधि – 2
उपरोक्त गर्म औषधीय गौमूत्र में आक या सफेदे की पत्तियों को डुबोकर सूजन या जोड़ों
पर सिकाई करने से दर्द गायब हो जाएगा।
परिणाम:
उपरोक्त जड़ी बूटियों को लगाने या सिकाई करने से सूजन कम हो जाएगी। रक्त के
थक्के पिघलेंगे। मांसपेशियां ढीली हो जाएंगी तथा राहत मिलती है। जोड़ों का दर्द चला
जाएगा। | चूंकि गौमूत्र एक दर्द निवारक होने से जल्द ही दर्द में लाभ होगा।
विशेष प्रयोग:
दर्द वाले पशु को गौमूत्र में अदरक, दालचीनी, हल्दी और नमक मिलाकर पीने से दर्द में
लाभ होता है। गैस भी अक्सर जोड़ों के दर्द का कारण बनता है। यह गायब हो जाएगा।
यह चार पैसे डाले हुए गौमूत्र को 150 ग्राम तक दिन में 2 बार 4 दिन तक पिलाएं।
प्याज के टुकड़े, हल्दी, नमक, गेहूं के आटे में डालकर, गूंथकर गरम करके दर्द और
जोड़ो पर इससे सिकाई करें।
दालचीनी, सोंठ, नमक और शहद सभी को मिलाकर गर्म पानी में डाले। इस मिश्रण का
दर्द वाली जगह या जोड़ों के दर्द पर मालिश करने से तुरंत लाभ होगा।
गर्म पानी में नमक डालकर सूजन पर रगड़ने से, बार-बार डालने से जोड़ों का दर्द दूर
होगा, गांठ घुल जाएंगी। आयोडेक्स की मालिश करने के बाद गर्म पानी की थैली से
सिकाई करने से भी लाभ होगा।