#9 – मुंह की बीमारियां
लक्षण और कारण:
दूषित, गंदे, कीटाणु युक्त पेयजल के साथ-साथ बासी, सड़ी हुई, फंगस या शैवाल लगी
हुई हरी घास खाने से मुंह के रोग होते हैं। मुंह और गले में जख्म हो जाते हैं। सूजन के
साथ मुंह में से पानी टपकता है। जानवर भोजन नहीं ले पाता और ना ही जुगाली कर
पाता। पशु बेचैन हो जाता है, खाना कम कर देता है और सुस्त हो पड़ा रहता है। दुख
और पीड़ा का अनुभव करता है। वजन कम होता जाता है। दूध का उत्पादन घटता है।
कब्ज के कारण मुंह में गर्मी होती है, उदर विकार या कब्ज भी बीमारी का एक कारण
है।
बीमारी के
बीमारी के उपचार हेतू उपयुक्त पदार्थ:
| 500 ग्राम पानी | 25 ग्राम त्रिफला चूर्ण |
| 25 ग्राम कत्था | 25 ग्राम मुलेठी |
| 50 ग्राम धनिया | 50 ग्राम गुलाब के फूल की पत्तियां |
| 50 ग्राम सौंफ | 50 ग्राम अडूसा के पत्ते |
| 50 ग्राम शतावरी | 50 ग्राम बबूल की छाल |
| 50 ग्राम गुड | 50 ग्राम शुद्ध मधु |
| 50 ग्राम तुलसी के पत्ते | 10 नंग कपूरी पान के पत्ते Betel Leaf |
| 50 ग्राम सोडा बाय कार्ब |
उपरोक्त सामग्रियों , अपने क्षेत्र में जितनी उपलब्ध हो उतनी सामग्री का उपयोग करें।
कैसे बनाएं:
उपरोक्त आयुर्वेदिक जड़ी बूटियों को काट कूट कर तथा बारीक पीसकर गौमूत्र में
डालकर अच्छी तरह उबालें । ठंडा होने पर तैयार मिश्रण को छानकर स्टील, मिट्टी या
कांच के बर्तन में रख ले।
7 दिनों तक इस दवा का उपयोग किया जा सकता है।
उपयोग कैसे करे:
उपरोक्त औषधियां मधु के साथ मिला कर दिन में 3 से 4 बार लगाएं एवं 1 हफ्ते तक
कुछ मात्रा में खिलाएं ।
मुँह में कत्था एवं मुलेठी के पाउडर से छिड़काव कर सकते हैं एवं मधु लगा सकते हैं
परिणाम:
उपरोक्त आयुर्वेदिक औषधि या मुंह की गंदगी को कम कर के मुंह के छाले एवं घावों की
चिकित्सा द्वारा पशु को ठीक करता है।
पशुओं की
खुराक:
मट्ठा, दूध या पानी (4 लीटर) में चावल, मकई, जौ एवं ज्वार का मोटा पिसा हुआ
आटा (कुल मिलाकर 2 किलो) को घोल कर उसमें गुड या शक्कर डालकर हल्की आंच
पर 3 लीटर पानी बच जाये तब तक उबालें। ठंडा होने पर गाय, भैंस या पशु को दिन में
दो बार डेढ़ लीटर की मात्रा में 1 हफ्ते तक दिलाए। छोटे बच्चों को आधी मात्रा में
पिलाएं।
सूचन:
पेट की गर्मी के कारण भी मुंह में छाले पड़ जाते हैं। पानी में 50 ग्राम अरंडी का तेल,
त्रिफला चूर्ण या हरड़ डालकर पिलाने से दस्त लग कर मुंह के छाले जल्दी ठीक हो जााते
है।
ग्लिसरीन या मधु में बोरिक एसिड पाउडर डालकर जीभ के ऊपर लगाना एवं खाने के
सोडा ( सोडा बाइ कार्ब) को पानी में घोल कर मुंह धोने से भी जल्दी आराम मिल जाता
है।