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खूर के रोंग या खुरपका

rog • October 1, 2026

#8 – खूर के रोंग या खुरपका

लक्षण और कारण:

कीचड़ या गंदगी में चलने से रोग के कीटाणु जानवरों के खुर में घुस जाते हैं। दलदल में
रहने से त्वचा सूज जाती है और फट जाती है। इसमें रोग के कीटाणु और कीड़े होते हैं।
खरी को चीरता है। उसमें से मवाद या खून निकलता है। जानवर चलने में लंगड़ाता है।
यह बीमारी वायरस के कारण भी होती है। यह रोग पशुओं में तेजी से फैलता है। रोग के
कारण पशु की दुग्ध उत्पादन क्षमता में भारी गिरावट आ जाती है। तेज ज्वर के साथ
मुँह, जीभ व खुर में छाले पड़ने से पशु पीड़ा से कहराता रहता है तथा खाना छोड़ देता है।

बीमारी के

बीमारी के उपचार हेतू उपयुक्त पदार्थ:

1 लीटर गौमूत्र (Cow Urine of Indigenous Breed) 100 ग्राम नीम के पत्ते (Azadirachta indica)
100 ग्राम गाय का गोबर Cow Dung of Indigenous Cow 100 ग्राम करंज के पत्ते (Pongamia pinnata)
50 ग्राम नमक 50 ग्राम नीला थोथा Copper Sulphate
50 ग्राम लहसुन 25 ग्राम हल्दी
100 ग्राम आक (मदार) के पत्ते Calotropis gigantea 50 ग्राम सोंठ पाउडर
50 ग्राम त्रिफला पाउडर 50 ग्राम तारपीन तेल Turpentine Oil
25 ग्राम बोरिक पाउडर 50 ग्राम तंबाकू (Tobacco)

उपरोक्त सामग्रियों , अपने क्षेत्र में उपलब्ध जितना हो सके उतनी सामग्रियों का
उपयोग करें।

कैसे बनाएं:

उपरोक्त आयुर्वेदिक जड़ी बूटियों को काट कूट कर या बारीक पीसकर गौमूत्र में डालकर
अच्छी तरह उबालें । ठंडा होने पर तैयार मिश्रण को छानकर स्टील, मिट्टी या कांच के
बर्तन में रख ले। गाय भैंस या पशुओं की संख्या के अनुपात में दवाई बनाइए।
इस दवा का उपयोग 90 दिनों तक किया जा सकता है।

उपयोग कैसे करे:

जानवर को सुलाकर उसके पैरों को बांधकर, ऊपर से गौमूत्र के मिश्रण को कपड़े या रुई
से रगड़ें। फिर उस पर त्रिफला और हल्दी पाउडर छिड़कें और उस पर गोबर लगा दें। हो
सके तो इसे थोड़ी देर के लिए सूखने दें और बाद में पत्तियों को बाँध दें। 7 दिन तक दिन
में दो बार इस प्रकार करें। करंज के तेल में लहसुन को पीसकर डालें और गर्म करके खुर
में लगाने से कीड़े निकल जाएंगे। घाव भर जाएगा।

परिणाम:

गौमूत्र और गोबर कीटाणु-नाशक होते हैं। इससे कीड़े नष्ट हो जाते हैं। इसमें इस्तेमाल
की जाने वाली जड़ी-बूटियाँ भी कीटाणुनाशक हैं जैसे कि नीला थोथा, तंबाकू, बोरिक
पाउडर, हल्दी आदि। इसे लगाने से बीमारी से जल्दी छुटकारा मिलेगा और गाय भैंस या
पशु को आराम मिलेगा।
●​ तारपीन के तेल और सीताफल (शरीफा) के पत्तों के रस को लगाने से कीड़े निकल
जाएंगे।

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