#28 – नेत्र रोग
लक्षण और कारण:
अधिक तर नेत्र रोग वायरस, बैक्टीरिया अथवा गंदे पानी के संपर्क में आने पशुओं में
देखे जाते है। इसके अलावा धूल के साथ अनेक प्रकार के कीटाणु आंखों में जाने के
कारण भी आंखों के रोग होते देखे जाते हैं।
आंखों की बीमारी से जानवरों की आंखों में लालिमा आ जाती है। आंखों से पीप और
पानी आता है। आंखें बहुत दर्द करती हैं और जानवर को काफी पीड़ा होती है। पशु सुस्त
होकर पड़ा रहता है। पशु को चैन नहीं आता और वह खाना कम खाता है। रोग के कारण
दूध का उत्पादन प्रभावित होता है। यह एक संक्रामक बीमारी है।
बीमारी के
बीमारी के उपचार हेतू उपयुक्त पदार्थ:
| 500 ग्राम गौमूत्र (Cow Urine of Indigenous Breed) | 100 ग्राम पलाश के पत्ते |
| 50 ग्राम बोरिक पाउडर | 50 ग्राम पलाश के फूल |
| 25 ग्राम फिटकरी | 50 ग्राम तुलसी |
| 100 ग्राम प्याज | 100 ग्राम गुलाब के फूल की पंखुड़ियां |
| 50 ग्राम शुद्ध शहद – आखिर में डालना है |
कैसे बनाएं:
उपरोक्त आयुर्वेदिक जड़ी बूटियों को काट कूट कर या बारीक पीसकर गौमूत्र में डालकर
अच्छी तरह उबालें । ठंडा होने पर तैयार मिश्रण को छानकर स्टील, मिट्टी या कांच के
बर्तन में रख ले। अंत में शुद्ध शहद मिलाएं।
उपयोग कैसे करे:
पशु की आंखों में उपरोक्त दवा 10 ग्राम दिन में तीन बार डालें।
विशेष:
बोरिक पाउडर या फिटकरी पानी में डालकर गर्म करें और छानकर हल्का गुनगुना हो
तब इससे पशु की आंखों को साफ करें। बाहर से भी साफ करें , ताकि मक्खियाँ आदि
परेशान ना करें। सिकाई भी करें।
पशु को धूप में या धूल भरे स्थान पर न ले जाएं।
आंखों के रोगों को ठीक करने के लिए पलाश के अर्क की बूंदें और गौशाला निर्मित
गौमूत्र नेत्रज्योति की बूंदें डालने से भी यह रोग दूर हो जाता है। रोगी पशु को अलग से
रखें। आंखों में शहद भी डाला जा सकता है।