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घाव, नासूर घाव, अल्सर

rog • October 1, 2026

#27 – घाव, नासूर घाव, अल्सर

लक्षण और कारण:

पशुओं को किसी नुकीली चीज से टकराने, गिरने या गिरने से घायल होने पर घाव बन
जाते हैं। इसमें गंदा, जंतु युक्त पानी लगने पर या अन्य किसी प्रकार का कचरा जाने
पर पशुओं के घाव में मवाद भर जाता है। घाव पक जाता है और सूजन आ जाती है।
इसमें कीड़े लग जाते हैं। यदि समय पर इलाज नहीं किया जाता है, तो यह कीड़े या
विभिन्न प्रकार के जंतु पैदा हो जाते है। घाव सड़ने लगता है। यह नासूर बन जाता है।

घाव हड्डियों तक पहुँच जाता है। इसमें बहुत अधिक मवाद हो जाती है। काफी मात्रा में
कीड़े हो जाते हैं और पशु दर्द से काफी पीड़ा महसूस करता है। अक्सर बुखार भी आता
है। खाना कम खाता है। दूध का उत्पादन कम हो जाता है। अक्सर गैंगरीन भी हो जाता
है।

बीमारी के

बीमारी के उपचार हेतू उपयुक्त पदार्थ:

1 लीटर गौमूत्र (Cow Urine of Indigenous Breed) 200 ग्राम देसी गाय का गोबर
200 ग्राम नीम के पत्ते 200 ग्राम करंज के पत्ते
200 ग्राम आक के पत्ते 100 ग्राम त्रिफला चूर्ण
100 ग्राम गूगल 100 ग्राम तंबाकू
100 ग्राम लहसुन 50 ग्राम हल्दी
25 ग्राम हींग 50 ग्राम तारपीन का तेल
50 ग्राम अदरक 50 ग्राम अपामार्ग के पत्ते
25 ग्राम अजवाइन 50 ग्राम सीताफल के पत्ते उपरोक्त सामग्रियां अपने क्षेत्र में जितनी हो सके उतना सामग्री का उपयोग करें।

कैसे बनाएं:

उपरोक्त आयुर्वेदिक जड़ी बूटियों को काट कूट कर या बारीक पीसकर गौमूत्र में डालकर
अच्छी तरह उबालें । ठंडा होने पर तैयार मिश्रण को छानकर स्टील, मिट्टी या कांच के
बर्तन में रख ले। गाय भैंस या पशुओं की संख्या के अनुपात में दवाई बनाइए।
इस दवा का उपयोग 90 दिनों तक किया जा सकता है।

उपयोग कैसे करे:

उपरोक्त गौमूत्र युक्त औषधि से घाव को अच्छी तरह धोएं और इसी औषधी को सूती
कपड़े यह रूई को डुबा करके घाव पर लगा दे रहे। फिर उसमें हल्दी और त्रिफला चूर्ण
छिड़ककर घाव को भर कर ऊपर से देसी गाय के गोबर को लगा दे।

परिणाम:

उपचार के दो सप्ताह बाद, घाव ठीक हो जाएगा। त्वचा पूर्ववत हो जाएगी। गौमूत्र
एंटीसेप्टिक है, इसलिए मवाद नहीं होगा। गौमूत्र दर्द शामक होने से दर्द भी दूर हो
जाएगा।

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