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कान के रोग

rog • October 1, 2026

#6 – कान के रोग

लक्षण और कारण:

कान में कीड़े या कीटाणु हो जाते हैं। कान से मवाद बाहर निकलता है। कान पक जाता
हैं। अंदर फफोले या घाव होते हैं। कानों में सूजन एवं दर्द होता है। जानवर अपने कान
हिलाता रहता है और सींग पीटता रहता है। बार-बार सिर हिलाना और बेचैन रहना साथ
ही खाना कम कर देना। नदी, झील या नाली के गंदे पानी में स्नान करने से गंदा पानी
कानों में जाता है। इसमें पनपने वाले कीड़े कानों में दर्द और सड़न पैदा करते हैं। कीड़े
मक्खियों के माध्यम से भी कान में प्रवेश करते हैं। कान के आसपास सूजन हो जाती
है। गाय भैंस या पशु ठीक से जुगाली नहीं करते। दर्द के कारण असहनीय पीड़ा होती है।

बीमारी के

बीमारी के उपचार हेतू उपयुक्त पदार्थ:

1 लीटर गौमूत्र (Cow Urine of Indigenous Breed) 50 ग्राम लसुन
100 ग्राम मरुआ (Origanum majorana) तुलसी की एक प्रजाति 25 ग्राम हींग (Asafoetida)
50 ग्राम बोरिक पाउडर 25 ग्राम अजवाइन
50 ग्राम तंबाकू (Tobacco) 100 ग्राम गाय के गोबर का रस Water extract of Indigenous Cow Dung
25 ग्राम गूगल 25 ग्राम कपूर – खाने वाला
100 ग्राम सीताफल के पत्ते Sugar-apple leaves 100 ग्राम करंज (Pongamia pinnata)
100 ग्राम नीम के पत्ते (Azadirachta indica) 100 ग्राम सफेदा (आक) के पत्ते
50 ग्राम तुलसी के पत्ते 25 ग्राम हल्दी

उपरोक्त सामग्रियों का, अपने क्षेत्र में जितना हो सके उतने पदार्थों का उपयोग करें।

कैसे बनाएं:

उपरोक्त आयुर्वेदिक जड़ी बूटियों को काट कूट कर तथा बारीक पीसकर गौमूत्र में
डालकर अच्छी तरह उबालें । ठंडा होने पर तैयार मिश्रण को छानकर स्टील, मिट्टी या
कांच के बर्तन में रख ले।
इस दवा का उपयोग 90 दिनों तक किया जा सकता है।

उपयोग कैसे करे:

विधि – 1 उपरोक्त गौमूत्र से निर्मित दवा को कान में डालें। दिन में तीन से चार बार,
सात दिन तक। बीमारी ठीक होने के बाद भी महीने में एक बार पशु के कान में डालें।

विधि – 2 उपरोक्त दवा गौमूत्र को जितना सहन हो सके उतना गर्म करके उसमें सूती
कपड़ा भिगो कर कान के चारों ओर सिकाई करें।

विधि – 3 गाय के गोबर में नमक और सोंठ मिलाकर हल्का गरम करके कान के आजू
बाजू लगाए और गोबर के कंड़ो पर कपड़ा गर्म करके सिकाई करें।

विधि – 4 गोबर के कंडे जला कर उस पर कपूर, गूगल, हल्दी, लहसुन और नीम के पत्तों
के साथ थोड़ा घी डाल कर धुआ पशु के कान में जाने दे। इससे कीड़े बाहर आ जाएंगे।

विशेष:

पशुओं के कान में “जैतून का तेल” डालने से भी अच्छे परिणाम मिलते हैं। यह
तेल आपको दवा की दुकान से प्राप्त हो जाएगा।

परिणाम:

गौमूत्र कीटाणुनाशक और दर्दनाशक है। इसमें आयुर्वेदिक जड़ी बूटियों में लहसुन,
तंबाकू, मरूआ, करंज, गूगल आदि कीटाणु नाशक होने के कारण कान के कीड़े बाहर
निकल जाएंगे। अंदर की सूजन और घाव ठीक हो कर रोग पूरी तरह से मिट जाएगा।

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