#21 – प्रसूति संबंधी रोग
लक्षण और कारण:
कमजोर या अशक्त जानवर और लगातार खूंटे से बंधे रहने वाले पशुओं को व्यायाम
नहीं मिलने के कारण प्रसूति के समय दिक्कत आती है। प्रजनन अंगों में रक्त का
संचरण तथा उनका संकुचन ठीक से नहीं होने के कारण पशु काफी बेचैन रहता है। कई
बार बच्चा टेढ़ा हो जाने के कारण भी सामान्य डिलीवरी होने में दिक्कत आती है
जिसके चलते सिजेरियन डिलीवरी करवानी पड़ती है। इस वजह से जानवर को और भी
परेशानियां सहन करनी पड़ती है। कई बार बच्चा गर्भ में ही मर जाता है।
बीमारी के
बीमारी के उपचार हेतू उपयुक्त पदार्थ:
| 250 ग्राम देसी गाय के गोबर का ताजा रस | 50 ग्राम अरंडी का तेल |
| 50 ग्राम हरड़ चूर्ण | 50 ग्राम सोंठ |
| 50 ग्राम सर्पगंधा |
उपयोग कैसे करे:
यदि प्रसव प्राकृतिक रूप से होने में दिक्कत आ रही हो तो उपरोक्त सामग्री काट कूट
कर गोबर के रस में मिलाकर 6 घंटों के अंतराल में तीन बार पिलाएं। इससे प्रसूति
सामान्य रूप से होने में काफी सहायता प्राप्त होती है। यदि बच्चा गर्भ में मर भी गया
हो तो भी उसे बाहर निकालने में मदद मिलेगी।
परिणाम:
ऐसा उपचार करने से ज्यादातर प्रसव प्राकृतिक रूप से हो जाते हैं। यदि तीन बार
पिलाने पर भी असर ना दिखें या गाय, भैंस या पशु बार-बार प्रेशर कर रहा हो या पशु
अत्यधिक कमजोर हो तो ज्यादा से ज्यादा डेढ-दो घंटा की राह देख कर अनुभवी डॉक्टर
को बुला कर, हाथ डलवा कर उचित प्रयास कर लेना चाहिये ।
भोजन:
प्रसव के बाद तुरंत 20 लीटर गुनगुने पानी में सौ से डेढ़ सौ ग्राम गुड़ और 10 ग्राम
हल्दी मिलाकर पीने के लिए देना चाहिये ।
इसके बाद पशु को ज्वार, मकई , बाजरी के साथ थोड़ी मात्रा में तेल मिलाकर नमक,
गुड, साबूदाना , धनिया, मेथी, अजवाइन, जीरा, सोंठ का पाउडर मिलाकर पशुओं को
पौष्टिक आहार दें। इसके अलावा जौ, ज्वार या मकई का घी और गुड में बनाया शीरा दे
सकते है। एक महीने तक सोंठ, गुड़ और घी के छोटे लड्डू बनाकर खिलाएं। तिल के
तेल से बना शीरा भी दें।
बच्चे को एक महीने के लिए दो थनों का दूध और अगले पांच महीनों के लिए एक थन
का दूध पिलाए। ऐसा करने से शावक एक अच्छी गाय या बैल बनेगा। जन्म के बाद,
मैली या जैर के गिरने का इंतजार न करें। पहला स्तनपान बछड़े को बहुत ताकत देता है
और साथ ही रोगप्रतिकारक शक्ति भी बढ़ाता है।
सावधानी:
प्रसव हुए पशु को जाली वाले कमरे में अलग से रखें ताकि कुत्ता, कौआ, बिल्ली या अन्य
जानवर जैर या अन्य निकला हुआ बिगाड़ पानी के लिए पशु को घायल न करे।
कभी-कभी प्रसव के बाद बच्चेदानी बाहर आ जाती है। सूजन आ जाती है। ऐसे मामलों
में इस हिस्से को डेटॉल, पोटेशियम परमैंगनेट या फिटकरी के घोल से धोएं, अपने हाथ
साबुन से हाथ धोकर, मोजे पहनें और हल्के हाथ से योनि को अंदर के तरफ धक्का दें।
हो सके तो गौमूत्र में थोड़ा नमक और सोंठ डालकर गर्म करें और इसे कपड़े से योनि पर
सिकाई करें। फिर डेटॉल से हल्के से धोएं और साफ हाथों से अंदर डालें। कुछ देर दबाकर
रखें। इंफेक्शन ना लगे इस बात का विशेष ध्यान रखें। पशु के बैठने की जगह
साफ-सुथरी एवं जंतु मुक्त रखें। मक्खियों या मच्छरों या पक्षियों और कुत्तों से बचाएं।
पंखे की सुविधा करें ।