#19 – पेट में प्लास्टिक की थैलियां
लक्षण और कारण:
शहर में आवारा घूमने वाले पशु घर से फेंकी गई प्लास्टिक की थैलियों में डाले गए
सब्जी या रसोई घर से बचा हुआ खाना खाने की वजह से पशु उस प्लास्टिक की बैग को
भी निगल जाते हैं। वे बैग धीरे-धीरे पेट में जमा होते जाते हैं। जानवर के पेट के बाहर
एक बड़ा ट्यूमर दिखाई देता है। जानवर दर्द से बहुत पीड़ित रहता है। पेट में वजन
बढ़ता जाता है। ऑपरेशन के दौरान अक्सर, जानवरों के पेट से 40 या 50 किलोग्राम से
भी ज्यादा प्लास्टिक बैग निकलती हुई देखी गई है। पशु सुस्त रहता है। इसका उनके
स्वास्थ्य पर गंभीर प्रभाव पड़ता है। पशुओं को हिलने डुलने में काफी दिक्कत आती है।
दूध का उत्पादन घटता है।
बीमारी को रीवर्स करने में प्रयुक्त पदार्थ:
1 लीटर गौमूत्र
(Cow Urine of Indigenous
Breed)
100
ग्राम
हरड
100
ग्राम
एरंड का तेल
50 ग्राम नमक
100
ग्राम
नीम गिलोय
50 ग्राम बायबिडंग
50
ग्राम
सोंठ
25 ग्राम हल्दी
25
ग्राम
तुलसी
50 ग्राम नींबू
50
ग्राम
इसबगोल
50 ग्राम सौंफ
उपरोक्त सामग्रियों , अपने क्षेत्र में जितनी हो सके उतनी सामग्री का उपयोग करें।
कैसे बनाएं:
उपरोक्त आयुर्वेदिक जड़ी बूटियों को काट कूट कर तथा बारीक पीसकर गौमूत्र में
डालकर अच्छी तरह उबालें । ठंडा होने पर तैयार मिश्रण को छानकर स्टील, मिट्टी या
कांच के बर्तन में रख ले।
उपयोग कैसे करे:
उपरोक्त गौमूत्र युक्त औषधि 300 ग्राम दवा 300 ग्राम पानी में बड़े पशु को और 100
ग्राम दवा 150 ग्राम पानी मिलाकर छोटे पशु को या वजन के हिसाब से पिलाएं।
परिणाम:
गौमूत्र, एरंड और हरड सभी रेचक है। तीनों को साथ में देने से थोड़ा जोर से जुलाब
लगेगा और ऊपर-ऊपर रहने वाली पन्नियां या आंतों में छोटी मोटी प्लास्टिक की
थैलियों के टुकड़े गोबर के माध्यम से बाहर आ जाएंगे।आतों के साफहो जाने पर पशु को
राहत मिलेगी।
यह प्रयोग शुरुआती दौर में ज्यादा उपयुक्त है।
नोट:
यदि पशु के पेट में प्लास्टिक की थैली लंबे समय से जमा हुई हो तो उसे निकाल पाना
मुश्किल है। यदि 3 या 4 डोस देने पर भी ना निकल पाए तो अनुभवी पशु चिकित्सक
की सलाह अनुसार रूमिन का ऑपरेशन करवाना ही उचित रहेगा।
अनुभव:
कृषि गौ सेवा संघ के प्रणेता पूज्य केसरी चंदन मेहता जी ने (मालेगांव, महाराष्ट्र)
उपरोक्त प्रयोग कर के सफलता पूर्ण अनेक पशुओं के पेट से प्लास्टिक बैग निकाली है।
प्रयास कीजिए। सफलता जरूर मिलेगी।