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मलेरिया (बुखार)

rog • October 1, 2026

#18 – मलेरिया (बुखार)

लक्षण और कारण:

यह रोग विशेष रूप से मानसून के मौसम में पशुओं में होता है। यहां वहां पानी भरा
रहने से कीचड़ हो जाता है | मच्छरों का प्रकोप बढ़ जाता है। मच्छर के काटने से
जानवरों में मलेरिया होता है। शरीर का तापमान 105 फारेनहाइट तक पहुँच जाता है।
जानवर ठंड कांपता है। वायरल संक्रमण भी बीमारी का कारण बनता है। जानवर खुराक
खाना और जुगाली करना बंद कर देता है। सुस्ती पड़ा रहता है। बुखार के कारण तड़पता

रहता है। सांसे चढ़ती है। पूरे शरीर के जोड़ों में दर्द होता है। उसे सर्दी-खांसी भी होती है।
पशु दूध का उत्पादन कम कर देता है।

बीमारी के

बीमारी के उपचार हेतू उपयुक्त पदार्थ:

1 लीटर गौमूत्र (Cow Urine of Indigenous Breed) 50 ग्राम त्रिफला चूर्ण
25 ग्राम मेथी दाना 50 ग्राम अजवाइन
50 ग्राम सोंठ 25 ग्राम पीपला मूल
50 ग्राम अडूसा 25 ग्राम लॉन्ग
25 ग्राम मामा 50 ग्राम नीम के पत्ते (Azadirachta indica)
100 ग्राम भूमि आंवला – कड़वी इमली 25 ग्राम बायबिडंग
50 ग्राम तुलसी 25 ग्राम काली जीरी
50 ग्राम अश्वगंधा 25 ग्राम पित्तपापड़ा Fumaria indica
50 ग्राम सुदर्शन पाउडर 25 ग्राम सेंधा नमक
50 ग्राम लहसुन 100 ग्राम प्याज

उपरोक्त सामग्रियों, अपने क्षेत्र में जितनी उपलब्ध उतनी सामग्रीका उपयोग करें।

कैसे बनाएं:

उपरोक्त आयुर्वेदिक जड़ी बूटियों को काट कूट कर तथा बारीक पीसकर गौमूत्र में
डालकर अच्छी तरह उबालें । ठंडा होने पर तैयार मिश्रण को छानकर स्टील, मिट्टी या
कांच के बर्तन में रख ले।

उपयोग कैसे करे:

उपरोक्त गौमूत्र युक्त औषधि 150 ग्राम दवा 300 ग्राम पानी में बड़े पशु को और 50 से
75 ग्राम दवा 150 ग्राम पानी मिलाकर छोटे बच्चों को या वजन के हिसाब से दिन में
तीन बार एक हफ्ते तक नियमित रूप से पिलाएं।

विशेष:

गाय के गोबर के कंडे जलाकर उसके ऊपर, आक के पत्ते, गूगल, नीलगिरी के पत्ते, नीम
के पत्ते, कपूर और थोड़ा घी डालकर इसका धुंआ जानवर की नाक में जाने दें।

परिणाम:

गौ मूत्र में विषाक्त पदार्थों को निकालने की अद्भुत क्षमता होती है। इसके साथ – साथ
दिए जाने वाली वस्तुओं में भी मलेरिया-बुखार को ठीक करने की अद्भुत शक्ति है।
उपरोक्त उपचार से पशुओं का बुखार ठीक हो जाएगा। पाचन शक्ति बढ़ेगी। सर्दी,
खांसी भी गायब हो जाएगी।

भोजन:
बड़े बीमार पशु को दूध में चावल, मक्का, बाजरा, जौ और मूंग का मोटा आटा 2 किलो,
2 लीटर दूध और 2 लीटर पानी में सोंठ, गुड़, काली मिर्च आदि उचित मात्रा में डालकर
अच्छे से उबले। एक समय में 2 लीटर दिन में तीन बार पिलाएं। 15 दिनों तक हल्का
सुपाच्य भोजन दें। कच्चा पपीता, गाजर, कद्दू, लौकी जैसे फल दे।

सावधानी:

मच्छरों और कीटों के संक्रमण को दूर करने के लिए, गाय के गोबर में, कपूर, गूगल,
नीलगिरी के पत्ते, हल्दी, बायविडंग, नीलगिरी के पत्ते, आक के पत्ते, करंज के पत्ते एवं,
घी डालकर धूप करें। सुबह-शाम खाने की गमाण या गाय के रहने की जगह के
आजू-बाजू की जगह पर डीडीटी, चूना, फिनाइल और मच्छर भगाने दवा का छिड़काव
करें। जगह को स्वस्थ और सुखी रखे। जानवरों को ठंड और बारिश से बचाए। शरीर को
कपड़े से ढके। गाय, भैंस या परसों को सुबह धूप में बिठाए। यदि संभव हो तो
मच्छरदानी का निर्माण करें।
पशुओं को गर्म पानी में नमक डालकर अच्छे से नहलाएं ।

नोट:

जानवरों को पर्याप्त आराम दें, उनसे काम ना करवाएं।

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