#15 – पथरी, किडनी के रोग
लक्षण और कारण:
अत्यधिक क्षारीय विषम तत्वों के साथ एक ही प्रकार का हरा चारा खाने से, क्षारीय
पानी पीने से पशुओं में पित्ताशय की पथरी हो जाती है। जानवर रुक रुक कर पेशाब
करता है। पेशाब करते समय जलन होती है। बहुत दर्द और पीड़ा होती है। यदि जल्दी
इलाज न किया जाए तो किडनी की बीमारी होती है।
बीमारी के
बीमारी के उपचार हेतू उपयुक्त पदार्थ:
| 1 लीटर गौमूत्र (Cow Urine of Indigenous Breed) | 50 ग्राम सूर्यक्षार Potassium Nitrate |
| 100 ग्राम नींबू का रस | 50 ग्राम गोखरू |
| 100 ग्राम पाषाण भेद के पत्ते Bergenia ligulata | 50 ग्राम जौ |
| 25 ग्राम सोडा बाई कार्ब | 50 ग्राम तुलसी |
| 25 ग्राम फिटकरी | 25 ग्राम सुपारी |
| 50 ग्राम अश्वगंधा | 50 ग्राम चूने का पानी |
| 25 ग्राम कत्था | 25 ग्राम हल्दी |
| 50 ग्राम कैर के फल | 50 ग्राम अनंतमूल की जड़ |
| 50 ग्राम बिजोरू | 25 ग्राम टंकणखार Borax Powder |
उपरोक्त सामग्रियों अपने क्षेत्र में जितनी उपलब्ध हो सके उतनी सामग्री का उपयोग
करें।
कैसे बनाएं:
उपरोक्त आयुर्वेदिक जड़ी बूटियों को काट कूट कर तथा बारीक पीसकर गौमूत्र में
डालकर अच्छी तरह उबालें । ठंडा होने पर तैयार मिश्रण को छानकर स्टील, मिट्टी या
कांच के बर्तन में रख ले।
इस दवा का उपयोग 15 दिनों तक किया जा सकता है।
उपयोग कैसे करे:
उपरोक्त जड़ी बूटी को बड़े जानवरों को दिन में दो या तीन बार 150 ग्राम की दर से
200 ग्राम पानी में और छोटे बछड़ों को 50 ग्राम की दर से 100 ग्राम पानी में मिला कर
देना चाहिए। एक सप्ताह तक इसका प्रयोग करें।
विशेष:
पानी में गोखरू, कैर, जौ और पाषाणभेद के पत्तों को कूट काट के अच्छे से उबाल कर
ठंडा करके छानकर पिलाए।
परिणाम:
उपरोक्त जड़ी बूटी देने से पथरी घुल कर निकल जाती है। साथ ही पशु के पेट पर सहन
हो सके उतना गर्म पानी डालें और पेट पर सिकाई करें।
नोट:
यदि पेशाब पूरी तरह से बंद हो जाता है, तो तुरंत पशु- चिकित्सक को बुला कर सलाह
लें तथा उपयुक्त उपचार की व्यवस्था करें।