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खांसी, कफ, सर्दी, सांस की तकलीफ

rog • October 1, 2026

#14 – खांसी, कफ, सर्दी, सांस की तकलीफ

लक्षण और कारण:

वायरल संक्रमण या बासी, सड़ा हुआ, फंगस या शैवाल लगी हुई हरी घास खाने और
तालाबों, नदी-नाले से प्रदूषित पानी पीने या बारिश या अत्यधिक ठंड में भिगोने से
जानवरों में खांसी, सर्दी या फ्लू हो जाता है। पशु को समय-समय पर खांसी होती है।
सांस लेने में कठिनाई। मुंह और नाक से पानी टपकता है। जानवर छींकता है। बेचैन
और सुस्त रहता है। अगर समय रहते इलाज नहीं किया गया तो बुखार भी आ सकता
है। ये बीमारियां ताजी हवा से रहित गंदे तथा नमी युक्त वातावरण में रहने के कारण
भी होती हैं।

बीमारी के

बीमारी के उपचार हेतू उपयुक्त पदार्थ:

1 लीटर गौमूत्र (Cow Urine of Indigenous Breed) 50 ग्राम लहसुन
50 ग्राम अजवाइन 20 ग्राम खाने वाला कपूर
25 ग्राम वावडिंग 50 ग्राम अरडूसी
25 ग्राम सोडा बाय कार्ब 20 ग्राम गूगल
50 ग्राम बांस की पत्तियां 50 ग्राम तुलसी
25 ग्राम पीपला मूल 50 ग्राम नौसादर
25 ग्राम लौंग 25 ग्राम दालचीनी
50 ग्राम प्याज 10 नंग कपूरी पान के पत्ते
25 ग्राम नीम गिलोय 25 ग्राम कत्था
25 ग्राम सोंठ या अदरक 25 ग्राम हल्दी
25 ग्राम पुदीना

उपरोक्त सामग्रियों , अपने क्षेत्र में जितनी उपलब्ध हो सके उतनी सामग्री का उपयोग
करें।

कैसे बनाएं:

उपरोक्त आयुर्वेदिक जड़ी बूटियों को काट कूट कर तथा बारीक पीसकर गौमूत्र में
डालकर अच्छी तरह उबालें । ठंडा होने पर तैयार मिश्रण को छानकर स्टील, मिट्टी या
कांच के बर्तन में रख ले।
इस दवा का उपयोग ज्यादा से ज्यादा 15 दिनों तक किया जा सकता है, इसके बाद नई
बनाए।

उपयोग कैसे करे:

उपरोक्त गौमूत्र युक्त औषधि बड़े पशु को १५० ग्राम और छोटे पशुओं को 50 ग्राम की
मात्रा में दिन में तीन बार दे। देते समय दवा में उससे दुगनी मात्रा में गर्म पानी मिला
करके दे।

विशेष उपचार:

गाय उपलो में थोड़ा सा घी, नीलगिरी के पत्ते, आक के पत्ते, गूगल, कपूर और अजवाइन
मिलाएं और इसका धुआं पशु के नाक और मुंह में जाने दे।

परिणाम:

उपरोक्त उपचार पशु के कफ को पिघलाकर दस्त के माध्यम से शरीर के बाहर निकाल
देता है। सर्दी-खांसी भी दूर हो जाती है। चूंकि गौमूत्र रेचक और सारक है, यह फेफड़ों
और आंतों को साफ करने और उन्हें सुदृढ़ बनाने में सहायक होता है। शरीर की नस
नालियों में जमा हुए कफ को साफ करके स्वच्छ बनाता है।

भोजन:
पशु को 4 लीटर दूध में काली मिर्च, पीपल मूल, दालचीनी, लौंग और सोंठ सब मिला
कर 10 ग्राम और 2 किलो जौ, ज्वार, चावल या मक्के का मोटा पिसा आटा डाल कर
अच्छे से उबाल कर दिन में दो बार दे।

विशेष देखभाल:
पशु के रहने की जगह के आसपास के क्षेत्र से पानी, कीचड़, अन्य प्रकार की गंदगी के
साथ नमी को दूर करें। डीडीटी, चूना, फिनाइल इत्यादि का छिड़काव कर पर्यावरण को
जीवाणु रहित करें। गौमूत्र और पानी में बाम, नीलगिरी का तेल, तारपीन का तेल,
कपूर, अजवाइन आदि को डालकर उसे अच्छे से उबालकर उसकी भाप को जानवरों के

नाक और मुंह में जाने दे। एकदम हल्का सा गर्म हो तो उसकी बूंदें नाक में भी डाली जा
सकती हैं।

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