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कृमि

rog • October 1, 2026

#5 – कृमि

लक्षण और कारण:

कीड़े जानवरों के पेट और आंतों में पैदा होते हैं। ये कीड़े आकार में छह इंच से लेकर एक
फुट तक लंबे हो सकते हैं। वे पेट का ज्यादातर भोजन खा जाते हैं। खून भी पीते हैं। इस
वजह से, जानवर दुबले और कमजोर हो जाते हैं। वजन कम हो जाता है। उनकी पसलियां
दिखाई देने लगती हैं। जानवर कंकाल की तरह दिखता है। कीड़े उसके दस्त में भी
जीवित या मृत दिखाई देते हैं। कृमि चपटे और भूरे रंग के केंचुए जैसे दिखाई देते है।

छोटे बच्चों में यह रोग व्यापक रूप से देखा जाता है। उसके पेट में काफी मात्रा में कृमि
उत्पन्न होते है। इससे उसके शरीर का विकास रुक जाता है। इसके कारण वह बीमार
और काफी परेशान रहते है। यह स्थिति बहुत कष्टप्रद होती है। पशुओं के पेट में दर्द
रहता है। कृमियों द्वारा पीड़ित होने से, पशुओं का दूध उत्पादन काफी हद तक कम हो
जाता है। यदि ठीक से इलाज न किया जाए तो छोटे जानवर मर भी सकते हैं।

दूषित, बैक्टीरिया युक्त गंदा पानी पीने से या गंदी, सड़ी हुई, फंगस लगी हुई घास खाने
से कृमि होने की सम्भावना बढ़ जाती हैं। कृमि होने के फल स्वरूप पाचन क्रिया मंद पड़
जाती है, साथ ही कब्ज होने से भोजन पेट एवं आंतों में सड़ता रहता है जिसके कारण
अन्य समस्याएं उत्पन्न होने लगती है।

बीमारी के

बीमारी के उपचार हेतू उपयुक्त पदार्थ:

1 लीटर गौमूत्र (Cow Urine of Indigenous Breed) 100 ग्राम नीम के पत्ते (Azadirachta indica)
100 ग्राम मेथी (Fenugreek) 50 ग्राम तुलसी
25 ग्राम काली मिर्च पाउडर (Black paper) 25 ग्राम तंबाकू (Tobacco)
50 ग्राम नमक 25 ग्राम अजवाइन (Carom Seeds)
25 ग्राम फिटकरी (Alum) 50 ग्राम अरंडी के तेल (Castor Oil)
50 ग्राम लहसुन 100 ग्राम करंज (Pongamia pinnata)
50 ग्राम सोंठ (Dry ginger) 15 ग्राम हींग (Asafoetida)
50 ग्राम ग्वारपाठा (Aloevera) 25 ग्राम हल्दी
50 ग्राम सीताफल के पत्ते Sugar-apple leaves 25 ग्राम बायबिरंग (Embelia ribes)
25 ग्राम महासुदर्शन चूर्ण 50 ग्राम इंद्रजव (Holarrhena Pubescens)
25 ग्राम काली जीरी (Centratherum Anthelminticum) 50 ग्राम चिरायता Andrographis paniculata
50 ग्राम हरड़ (Terminalia chebula)

उपरोक्त सामग्रियों से, अपने क्षेत्र में जितनी उपलब्ध हो सके उतनी सामग्री का
उपयोग करें। पशुओं की संख्या के अनुसार सात दिनों की दवाई एक साथ बनाए।

कैसे बनाएं:

उपर्युक्त सभी आयुर्वेदिक जड़ी बूटियों को काट कूट कर या बारीक पीसकर गौमूत्र में
डालकर अच्छी तरह उबालें । ठंडा होने पर तैयार मिश्रण को छानकर स्टील, मिट्टी या
कांच के बर्तन में रख ले।
इस दवा का उपयोग 15 दिनों तक किया जा सकता है।

कैसे और किस मात्रा में दें:
●​ बड़े जानवरों के लिए (200 किलो के ऊपर )
■​ 150 ग्राम तक तैयार किया हुआ गौमूत्र
■​ 250 ग्राम उबला हुवा पानी

➢​गौमूत्र तथा औषधि के घोल को उबले हुए पानी में मिलाकर पशु को नाल से
पिलाए।
➢​दिन में 2 बार, 7 दिनों तक, फिर महीने में 1 बार पिलाएं।

●​ छोटे बच्चों के लिए
■​ 50 से 100 ग्राम -उम्र और वजन के हिसाब से
■​ 200 ग्राम उबला हुवा पानी
➢​गौमूत्र तथा औषधि के घोल को उबले हुए पानी में मिलाकर दिन में 1 बार 7
दिनों तक दें।
➢​फिर इसे हर महीने या 15 दिनों में 1 बार दें।

परिणाम:

✓​गौमूत्र कीटाणुनाशक है- यह सभी प्रकार के रोगों के कीड़ों को नष्ट करता है।
इसमें मिलाई जाने वाली कड़वी जड़ी-बूटियाँ भी कृमि नाशक हैं। यदि आप इस
गौमूत्र की खुराक देने के बाद पशु के गोबर की जांच करते हैं तो आपको जीवित
या मृत कृमि मिलेंगे। कृमि का नाश करने के लिए गौमूत्र एक अद्भुत और
चमत्कारी औषधि है।

✓​गौमूत्र अच्छा रेचक भी है। यह पेट और आंत के मल,अन्य अपशिष्टों और सभी
कीड़ों को नष्ट कर देगा। अरंडी का तेल एवं हरड़ जैसी जड़ी बूटियां आंतों को
साफ करके पाचन तंत्र और उत्सर्जन प्रणाली को सक्रिय करते हैं।

✓​यह जानवर के पाचन तंत्र को सक्रिय करेगा। सेहत में बहुत सुधार होगा।

✓​इससे वजन बढ़ेगा।

✓​दुग्ध उत्पादक क्षमता बढ़ेगी।
आहार:
●​ राब या सुपाच्य अर्ध ठोस आहार
■​ जव, चावल, बाजरा, ज्वार और मक्के का मोटा आटा (सभी 200 ग्राम,
कुल मिलाकर 1 किलो)
■​ 5 ग्राम नमक और 50 ग्राम गुड़
■​ 2 लिटर पानी
■​ 5-5-5 ग्राम सोंठ, हल्दी और मेथी (वैकल्पिक)

■​ 500 मी.ली. दूध या मठ्ठा
इन सभी को मिलाकर, उबालकर, दूध या मट्ठा मिलाकर दिन में 2 बार,
बड़े पशु को 2 लीटर तक और दूध न पीते बड़े बच्चों को 1 लीटर तक पिलाए।
●​ पौष्टिक आहार
दिन में पशु को, कच्चे-पक्के पपीते, गाजर, केला, टमाटर, खीरा, पालक,
मीठा नीम, मेथी, आदि सब्जियाँ और फल काट के 15 दिन तक दिए जाने
चाहिए । इससे उन्हें पौष्टिक आहार मिलेगा। कमजोरी और दुर्बलता दूर होगी।
इस राब को दूध या छाछ में भी बनाया जा सकता है। आटे से चार गुना अधिक
तरल पदार्थ जैसे पानी, दूध या छाछ इत्यादि लें। पानी आधा रह जाने तक
उबालें, फिर ठंडा करें और मवेशियों को पिलाए। छोटे बच्चों को आधी मात्रा में
दे।
●​ सामान्य आहार
सामान्य रूप से दिए जाने वाले सूखे और हरे चारे को देना बरकरार रखें।
जब तक आप राब दे रहे हो तब तक पशु आहार या बांटे को कम या बंद कर
सकते हो।
इस प्रक्रिया के दरमियान यदि पशु को दस्त या अन्य किसी प्रकार की कोई
प्रतिक्रिया देखने को मिले तो घबराए नहीं।

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