#30 – पशुओं का स्नान और स्वास्थ्य
स्नान कराने के कारण:
गाय, भैंस या पशुओं के आस-पास कीचड़, गाद, गोबर, मूत्र, गंदा पानी और हरी घास
आदि का कचरा बड़ी मात्रा में जमा हो जाता है। जानवर अक्सर ऐसे कीचड़ या गंदे
स्थानों में उठता बैठा रहता है। इन जगहों पर कई प्रकार के सूक्ष्म-जीव और रोग के
कीटाणु होते हैं। यें जानवर के शरीर से चिपक जाते हैं। इसके अलावा, रोग के कीटाणु
थन और अडर पर भी चिपक जाते हैं जिससे थन एवं अडर के कई प्रकार के रोग जन्म
लेते हैं। शरीर से चिपके रहने से त्वचा के रोग हो जाते हैं। साथ ही शरीर के रोम कूप या
त्वचा के छिद्र गंदगी से भरे जाते हैं जिसके कारण शरीर के अंदर का पसीना शरीर से
बाहर नहीं निकल पाता। इसके कारण जानवरों के गुर्दे को अधिक काम करना पड़ता है।
किडनी ओवरलोड हो जाती हैं। परिणाम स्वरूप मूत्र रोग या गुर्दे की बीमारियां पैदा होती
है जैसे कि किडनी की पथरी। अफसोस की बात यह है कि भारत में पानी की कमी के
कारण या किन्हीं अन्य कारणों से शायद ही किसी जानवर को नहलाया और साफ
किया जाता है।
पशु के शरीर पर कीचड़ या गंदगी जमा होने से पशु के स्वास्थ्य को बहुत नुकसान होता
है। जानवर सुस्ती और बेचैनी का अनुभव करता है। यदि मनुष्य दो या तीन दिनों तक
स्नान नहीं करता है, तो उसके शरीर और मन जो गती हो जाती है वैसे ही जानवरों की
भी होती है।
स्नान के प्रकार
डेनमार्क, इज़राइल, ब्राजील, यूरोपीय देशों के साथ-साथ अफ्रीका आदि में, गायों तथा
अन्य जानवर के शरीर को विभिन्न रसायनों वाले पानी के फव्वारों के बीच से पास
करवा कर अच्छे से साफ किया जाता है। इसके बाद ही उसे साफ पानी से नहलाया
जाता है। इन सभी देशों में, जानवरों के शरीर को दैनिक रूप से वैज्ञानिक तरीके से साफ
किया जाता है और उनके आवास बहुत साफ-सुथरे और जंतु रहित रखे जाते हैं। ऐसे ही
कई कारणों से ब्राजील जैसे देशों में हमारे देश की लाल गायें प्रतिदिन 50 लीटर से
अधिक दूध देती हैं। हमारे देश में यही गायें औसतन 1 लीटर से कम दूध देती हैं। यह
हमारे वैज्ञानिक दृष्टिकोण, पौष्टिक भोजन, व्यायाम और स्वच्छता की कमी के कारण
है।
नहाने का प्रकार – 1:
● 2 लीटर देसी गाय का गौमूत्र
● 2 लीटर पानी
गौमूत्र में पानी अच्छे से मिलाएं और सूती कपड़े से गाय या अन्य पशु के शरीर पर रगड़
कर मालिश करके नहलाए।
नहाने का प्रकार – 2:
● 2 लीटर देसी गाय का गौमूत्र
● 1 किलो देसी गाय का गोबर
● 2 लीटर पानी
इन सभी को अच्छे से मिलाएं और गाय या अन्य पशु के शरीर पर रगड़ कर मालिश
करके नहलाए।
नहाने का प्रकार – 3:
● 3 लीटर देसी गाय का गौमूत्र
● 3 लीटर पानी में नीम, करंज, मदार, सीताफल जैसे कड़वे पेड़-पौधों के पत्ते
भिगोए
● 1 किलो देसी गाय का गोबर
● 100 ग्राम नमक
इन सभी को अच्छे से मिला कर अच्छे से उबालकर छान लें। ठंडा होने पर गाय या
अन्य पशु के शरीर पर इसे अच्छे से रगड़ कर मालिश करके नहलाए।
नहाने का प्रकार – 4:
सादे पानी में चूने के ऊपर का पानी, नौसर , तारपीन का तेल, नीलगिरी का तेल, नीम
के पत्ते या नीम का तेल, सुरोखार आदि के साथ मिलाएं, इसे अच्छे से उबालकर ठंडा
करके गाय या अन्य पशु के शरीर पर इसे अच्छे से रगड़ कर मालिश करके नहलाए।
नहाने का प्रकार – 5:
सर्दी के मौसम में तिल, अरंडी का तेल और खोपरा का तेल मिलाकर उसमें कपूर और
गूगल डालकर गर्म करें और हाथ से रगड़ कर मालिश करने के बाद पशु को नहलाए ।
नहाने का प्रकार – 6:
स्वच्छ पानी से अच्छे से रगड़ कर गाय, भैंस या पशु को हफ्ते में दो-तीन बार स्नान
कराएं।
निर्देश:
उपरोक्त स्नान करवाने के बाद पशु के शरीर को साफ कपड़े से पोंछे।
गौमूत्र स्नान पखवाड़े में या महीने में एक बार दिया जाना चाहिए। सादे पानी से हफ्ते
में दो तीन बार स्नान कराया जाना चाहिए ।
परिणाम:
गौमूत्र और गाय के गोबर में कार्बोलिक एसिड जैसे कई अन्य अम्लीय तत्व होते हैं।
यह त्वचा को साफ करता है। इससे त्वचा के रोग जैसे खुजली, खसरा, एक्जिमा नहीं
होता। गौमूत्र एक एंटीसेप्टिक होने के कारण यह त्वचा पर मौजूद छोटे और बड़े घाव
दूर करने में सहायक होता है। गोमुत्र घावों में मवाद नहीं होने देता।
कड़वे नीम, मदार, करंज, मरुआ, तुलसी या सीताफल के पत्ते या फलों या फूलों में
कीटनाशक होते हैं। इसलिए, यह जानवरों की त्वचा पर रोगाणु और खून चूसने वाले
कीड़े जैसे गोचीड, जूँ, या अन्य टिक्स को नष्ट करके त्वचा को कीटाणुरहित करता है।
चमड़ी के रोम-कूप खुल जाने से पसीना बाहर आता है। गुर्दे पर दबाव कम हो जाता है।
स्वास्थ्य में सुधार आता है।
उपरोक्त तरीके से मालिश करने से जानवर की त्वचा लचीली, कोमल, चमकदार,
चिकनी, उज्ज्वल और जंतु रहित हो जाएगी।
मालिश से पशु का रक्त संचार बढ़ेगा। मांसपेशियों और जोड़ों के दर्द ठीक हो जाता है ।
शरीर ऊर्जावान, चुस्त और स्वस्थ होगा। जानवर के मन और शरीर में ताजगी और
खुशी दोनों का अनुभव होगा। पशुओं के स्वास्थ्य में सुधार होगा। वजन बढ़ेगा। रोग
प्रतिकारक शक्ति बढ़ेगी। जीवनकाल बढ़ेगा। साथ ही दूध का उत्पादन और वहन
क्षमता भी बढ़ेगी।
विशेष:
पहले के समय में जानवर नदी या झील में प्रतिदिन स्नान करते थे, इसलिए उनका
शरीर साफ रहता था जबकि आज नदियां और झीलें सूख गई है। जानवरों को एक ही
जगह पर खूंटे से बांध के रखने के कारण उनको नहलाना बहुत जरूरी हो गया है।